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Women Reservation Bill 2023: लोकसभा से पारित के बाद आज राज्यसभा में पेश होगा महिला आरक्षण बिल, जानिए कब मिलेगी ‘नारी शक्ती’

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Women Reservation Bill 2023: 20 सितंबर बुधवार 2023 को नई संसद भवन लोकसभा से महिला आरक्षण बिल पास हो चुका है, साथ ही बता दें कि नई सदन में पारित होने वाला यह पहला बिल है जो महिलाओं के समर्थन में है. इस बिल लोकसभा के 452 सांसदों ने समर्थन दिया है और दो सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया है.

इस बीच देश भर में महिलाओं में खुशी का महौल है. यह बिल आज 21 सितंबर को राज्यसभा में पेश किया जाएंगा. अगर यह बिल राज्यसभा भी पास हो गया तो कब तक इस बिल को देश में लागू हो जाएगा और यह देश के महिलाओं को कब लाभ मिलने लगेंगा.

कब मिलेगी ‘नारी शक्ती’

यह बिल राज्यसभा में अगर पास हो जाता है तो आइए जानते है देश की महीलाओं को कब लाभ मिलेंगा. यह बिल राज्यसभा से पास हो जाने के बाद जनगणना और परीसीमन से जुड़ा है. बता दें कि वर्ष 2021 में देश की जनगणना होने वाली थी लेकिन अभी तक नहीं हो पाई हैं और न ही इस बात की कोई जानकारी नहीं है की कब जनगणना होगी.

जनगणना के बाद परिसीमन होगा यानी कि आबादी के दृष्टि से लोकसभा क्षेत्र का पुनर्निधारण किया जाएगा और तब जाकर इस कानून को लागू किया जाएगा. ऐसे में यह 2024 में लागू नहीं हो सकता है. हालांकि, इसे 2029 में लागू होने की उम्मीद है.

आइए जानते है यह बिल कब- कब संसद में पास हुआ

12 सितंबर 1996 को देश में पहली बार महिला आरक्षण बिल पेश किया गया था, उस समय एचडी देवगौड़ा की सरकार थी. लेकिन उन्हीं के समर्थन की सरकार अल्पमत में आ गई और समर्थन दे रहे समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और लालू यादव ने इस बिल का विरोध किया था.

इसके अगले वर्ष 1997 में एक बार फिर से इस बिल को पास करने का प्रयाश किया गया लेकिन उस समय शरद पवार ने इसका विरोध किया और महिलाओं को लेकर बोले थे कि वे क्या समझेंगी और वो क्या सोचेंगी.”?

साल 1998 में लोकसभा में अटल बिहारी वाजपेयी की NDA की सरकार में कानून मंत्री के तहत बिल पेश करने का प्रयाश किया था लेकिन वे सफलन नहीं हो पाएं थे. 1999 में भी इस बिल को पारित करने का पूरा प्रयास किया गया था लेकिन सफलता नहीं मिली थी. वाजपेयी की सरकार में साल 2003 में भी इस बिल को पास करने का प्रयाश किया लेकिन इस बिल के तहत काफी हंगामा हो गया और जिस कारण बिल स्थगित हो गया था.

साल 2010 में इस बिल को UPA की सरकार में इस बिल को राज्यसभा में पेश किया था लेकिन समाजवादी पार्टी और राजद ने सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी. इसके बाद इस बिल को स्थगित कर दिया गया था.

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